As is customary, when I visited my grandchildren this time round, I asked them for their wish list of books. The younger one, all of nine years, said she wants nothing but Roald Dahl. She has read them all and she thinks that, that is all there is to good writing.

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चीन पर पड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसकी हठ-धर्मिता को झुकना पड़ा और यूएन ने कुख्यात आतंकी मसूद अजहर को 'ग्लोबल टेररिस्ट' घोषित कर दिया। इसे भारत की कूटनीतिक विजय ही माना जाएगा। कुछ मित्रों का कहना है कि मसूद को बीजेपी की सरकार ने ही तो आतंकियों को सौंप दिया था आदि।

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Kanhaiya Kumar camaigning in Begusarai.

सुना था बाल मन को जिस सांचे में ढालो वह ढल जाता है. बात सही भी है. बचपन में हर बच्चा एक एम्पटी कैनवस की तरह होता है जिस पर हम जो रंग भरना चाहे भर सकते हैं. यह बात परीवार और आसपास के पर्यावरण पर मजबूती से निर्भर करता है.

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जेकेएलएफ के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की जेल से रिहाई के लिए गुहार लगा रही है। (शायद धरने पर भी बैठी है।) यह वही अलगाववादी नेता यासीन मलिक है जिसपर 25 जनवरी 1990 में भारतीय वायुसेना कर्मियों पर आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप है। इस हमले में वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित चार वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि 10 वायुसेना कर्मी जख्मी हो गए थे। और भी कई संगीन आरोप हैं इस अलगाववादी मलिक पर।

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लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद विपक्ष ने ईवीएम के इस्तेमाल पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। रविवार को 21 पार्टियों ने नई दिल्ली में लोकतंत्र बचाओ बैनर के तले प्रेस कांफ्रेंस कर ईवीएम को लेकर गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग को ईवीएम की गड़बड़ी के विरोध में ज्ञापन दिया। निस्तारण नहीं हुआ तो मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा भी की। 

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टीवी चैनलों पर दिखाई जाने वाली बहसों का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए विचार-मंथन द्वारा जनता के सोच या फिर उसके चिन्तन का सही-सही प्रतिनिधित्व करना ताकि श्रोता/दर्शक के ज्ञान में इज़ाफा हो। अन्य प्रकार के विषयों यथा विज्ञान, समाजशास्त्र, पर्यावरण, कला-साहित्य आदि से जुडी बहसों में एंकर आत्मपरक हो सकता है, मगर राजनीतिक विषयों और खासतौर पर समसामयिक और अति संवेदनशील मुद्दों पर होने वाली बहसों में उसका निष्पक्ष और वस्तुपरक होना अति आवश्यक है।

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The Election Commission of India is responsible for executing free and fair elections across the country. This is one of the most respectful institutions constitutionally empowered to exercise its power in letter and spirit. Challenges are many but the foremost is the abuse of black money by the candidates. Be it anything, their sole purpose is to win the election. Tainted politicians, regardless of their magnitude of criminal history, they manage to win elections and reach the parliament.

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‘Garibi Hatao’, a slogan that Mrs. Gandhi deployed to reap electoral dividends is still a blue-chip issue and Mr. Rahul Gandhi has discovered the magical properties of the mantra, never mind that more than fifty years (out of which Congress was in power for forty and the BJP, in its turn, was too busy catering to the ultra-rich) have elapsed between the two initiatives.

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केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) को 'आतंक विरोधी कानून' के तहत बैन कर दिया है और इसके सरगना यासीन मल्लिक को देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए नजरबंद कर दिया है.

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It is the election time in India as Election Commission has announced the election dates starting from 11th April 2019 until 19th May 2019. As a result, code of conduct during election period is in place so that political parties and candidates cannot influence the voters by any means and elections are conducted in a fair and peaceful environment.

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पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण अड्डे पर भारतीय वायु सेना के हमले में मरे आतंकवादियों की संख्या/गिनती के बारे में पिछले कुछ दिनों से बहसबाजी हो रही है। एक बात समझ में नहीं आरही। वायुसेना बमवर्षा कर सकुशल अपने क्षेत्र में तुरत-फुरत लौटने का यत्न करेगी या लाशों की गिनती करने में जुट जायगी?

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Tulsi Das's memorable line, "Jaa Kee Rahi Bhavana Jaisee, Prabhu Moorat Dekhi Tinh Tasie" (God in his incarnate form appeared to his devotees in whichever image they wanted him to manifest), can be said to be a universal and timeless rule of perception; you see, what you want to see.

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